Home मुख्य समाचार CWC Meeting: नेतृत्व को लेकर मचे घमासान के बीच कामराज प्लान के...

CWC Meeting: नेतृत्व को लेकर मचे घमासान के बीच कामराज प्लान के लायक भी नहीं बची कांग्रेस

[

हाइलाइट्स:

  • 1963 में हुए 3 लोकसभा उपचुनावों में कांग्रेस हार गई
  • के कामराज (K Kamaraj Plan) ने नेहरू को एक प्लान सुझाया
  • ये प्लान कुछ नेताओं को साइडलाइन करने के लिए है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं था
  • कांग्रेस अब इस लायक भी नहीं बची कि उसमें कामराज जैसा प्लान भी लागू किया जा सके

नई दिल्ली
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी की हालत देखकर सत्ताधारी पार्टी भी चैन की सांस ले रही होगी। यह हकीकत है कि 2014 के बाद से ही विपक्ष क्या होता है न तो संसद में दिखा न ही सड़क पर। आज कांग्रेस पार्टी इस कगार पर पहुंच गई कि पार्टी के वरिष्ठ नेता या यूं कहा जाए कि पार्टी के बुनियादी नेता ही आज इस्तीफे की बात कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस का एक नेता याद आता है जिसने कांग्रेस को ऐसे ही एक बुरे वक्त से बाहर निकाला था। वह थे के. कामराज और उन्हीं नाम पर कांग्रेस के अंदरूनी कलह को हल हल करने के फॉर्म्युले को कामराज प्लान के नाम से जाना जाता है। लेकिन तब की परिस्थितियां और आज की परिस्थितियों में जमीन आसमान का फर्क है। आइए, समझते हैं कि आखिर क्या है कामराज प्लान और आखिर क्यों आज कांग्रेस उस प्लान के लायक भी नहीं रह गई है।

1963 में हुए 3 लोकसभा उपचुनावों में कांग्रेस हारी
1962 के लोकसभा चुनाव (1962 Lok Sabha Election) में कांग्रेस को लगातार तीसरी बार जीत मिली। जवाहर लाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) लगातार चौथी बार देश के प्रधानमंत्री बने। इसके कुछ ही महीनों बाद चीन के साथ भारत का युद्ध हुआ। इस युद्ध में भारत को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद नेहरू की विदेश नीति पर सवाल उठने लगे और विरोध के स्वर भी मुखर हुए। उधर वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने देश की जनता पर भारी टैक्स का बोझ डाल दिया। ऐसे में जनता के बीच कांग्रेस को लेकर भरोसा डगमगाने लगा। इसकी झलक तब दिखी, जब 1963 में हुए 3 लोकसभा उपचुनावों में कांग्रेस हार गई।

आसान नहीं था कामराज का प्लान
कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, (संकट की इस घड़ी में) के कामराज (K Kamaraj Plan) ने नेहरू को एक प्लान सुझाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को सरकार में अपने पद छोड़कर पार्टी के लिए काम करना चाहिए। इसी प्लान को के कामराज प्लान कहा जाता है। ये सुझाव थोड़ा मुश्किल था क्योंकि उस वक्त भी कुछ ऐसे नेता थे जिनको ऐसा लग रहा था कि ये प्लान कुछ नेताओं को साइडलाइन करने के लिए है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं था।

2 महीने के अंदर ही यह लागू हो गया
इस प्लान को कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने मंजूरी दे दी और 2 महीने के अंदर ही यह लागू हो गया। खुद कामराज ने इसी प्लान के तहत 2 अक्टूबर 1963 को मद्रास के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उस दौरान कामराज, बीजू पटनायक और एसके पाटिल सहित 6 मुख्यमंत्रियों और मोरारजी देसाई, जगजीवन राम और लाल बहादुर शास्त्री सहित 6 मंत्रियों ने अपने पद छोड़े थे। इसके बाद ये सभी पार्टी के लिए काम करने में जुट गए। सरकार में पद छोड़कर पार्टी में काम करने के इसी प्लान को कामराज प्लान कहा जाता है।

कितना सफल रहा ये प्लान
अब सवाल ये उठता है कि कामराज प्लान कितना सफल हुआ। 1962 में कांग्रेस ने 488 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से उसे 361 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जबकि 1967 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 516 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिनमें से उसे 283 सीटें ही मिलीं। इस तरह कांग्रेस के प्रदर्शन में गिरावट आई। इस पहलू को ध्यान में रखकर कामराज प्लान को सफल नहीं कहा जा सकता।

आहत थे नेहरू
दिवंगत पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी आत्मकथा बियॉन्ड द लाइन्स में लिखा, ‘चीन पर अपनी नीति को लेकर नेहरू कई प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों की कटु आलोचना से आहत महसूस कर रहे थे। तभी कामराज ने सुझाव दिया कि कैबिनेट के सदस्यों को संस्थागत काम करके पार्टी को मजबूत करना चाहिए। मेरी अपनी सूचना थी कि यह नेहरू का विचार था और कामराज इसे अभिव्यक्त कर रहे थे। दो प्रमुख आलोचकों मोरारजी देसाई और जगजीवन राम के साथ-साथ शास्त्री को भी कैबिनेट से हटाकर पार्टी के काम में लगा दिया गया।’

वो पहले की कांग्रेस थी और ये आज की…
इतने सारे बदलाव किए गए मगर पार्टी में बगावती या फिर किसी नेता ने इस्तीफे की पेशकश नहीं की। मगर आज की कांग्रेस पार्टी ऐसी नहीं है। कांग्रेस में कुछ नेताओं ने नेतृत्व के खिलाफ अपनी अभिव्यक्ति जाहिर की लेकिन कांग्रेस के युवराज को ये बात रास नहीं आई और उन्होंने उन्हीं कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगा दिया जिन्होंने पार्टी के लिए अपना जीवन खपा दिया। इसीलिए अब लगने लगा है कि कांग्रेस अब इस लायक भी नहीं बची कि उसमें कामराज जैसा प्लान भी लागू किया जा सके।

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

लोकप्रिय

गिरीश चंद्र मुर्मू देश के नए सीएजी नियुक्त किए गए, राजीव म‍हर्षि की लेंगे जगह

[ Publish Date:Thu, 06 Aug 2020 10:56 PM (IST) नई दिल्‍ली, जेएनएन। गिरीश चंद्र मुर्मू को देश के नया भारत के नियंत्रक और महालेखा...

लद्दाख विवादः शरद पवार ने राहुल को दिलाई अतीत की याद, कहा- भूल नहीं सकते 1962 में क्या हुआ था

[ राहुल गांधी-शरद पवार (फाइल फोटो) - फोटो : PTI पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर Free मेंकहीं भी, कभी भी। 70 वर्षों से करोड़ों पाठकों की पसंद ख़बर...

LIVE India Coronavirus Updates: 24 घंटे में कोरोना के 10,667 नए मामले, 10,215 मरीज हुए ठीक

[ Publish Date:Tue, 16 Jun 2020 09:54 AM (IST) नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus in India) के सक्रिय मामलों के मुकाबले स्वस्थ...

सुशांत केस में ड्रग्स कनेक्शन LIVE: रिया और सैमुअल के घर सुबह-सुबह NCB टीम ने मारा छापा, ड्रग्स चैट लीक के बाद सर्च

;t=b.createElement(e);t.async=!0;t.src=v;s=b.getElementsByTagName(e);s.parentNode.insertBefore(t,s)}(window,document,'script','https://connect.facebook.net/en_US/fbevents.js');fbq('init', '2442192816092061');fbq('track', 'PageView'); Source link

Sushant Singh Rajput Case: सुब्रमण्यम स्वामी ने सुशांत की मौत को बताया मर्डर, दिए ये बड़े सबूत

[ Publish Date:Thu, 30 Jul 2020 12:57 PM (IST) नई दिल्ली, जेएनएन। एक्टर सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस वक्त के साथ और भी उलझता...