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India-China Border Tension: चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की पुख्ता तैयारी, चीन की ओर मोड़ा बोफोर्स का मुंह

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Edited By Dil Prakash | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

बोफोर्स गन (फाइल फोटो)
हाइलाइट्स

  • मई की शुरुआत से एलएसी पर आमने-सामने डटी हैं भारत और चीन की सेनाएं
  • चीन ने सीमा पर हथियारों, टैंकों और आर्टिलरी गनों की तैनाती बढ़ाई
  • भारत भी चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की फिराक में
  • शॉर्ट नोटिस पर सीमा पर तैनात किए जा सकते हैं आर्टिलरी गन और टैंक

नई दिल्ली

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सेनाओं के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव (India-China standoff along LAC) जारी है। इसे सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन दोनों सेनाएं अपनी पोजिशन से पीछे हटने को तैयार नहीं है। चीन ने सीमा पर अपने सैनिकों के साथ-साथ हथियारों, टैंकों और आर्टिलरी गनों की भी तैनाती बढ़ाई है। इसके जबाव में भारत ने भी पूरा इंतजाम किया है।

सूत्रों के मुताबिक भारत ने लद्दाख सीमा पर चीन की किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पुख्ता तैयारी कर रखी है। शॉर्ट नोटिस पर टी-72, टी-90 टैंकों और बोफोर्स जैसी आर्टिलरी गनों को लद्दाख सीमा पर तैनात किया जा सकता है। स्वीडन से हासिल बोफोर्स गनों ने करगिल युद्ध के दौरान अपनी उपयोगिता साबित की थी और पाकिस्तानी घुसपैठियों के छ्क्के छुड़ा दिए थे। इस तोप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह -3 से लेकर 70 डिग्री के ऊंचे कोण तक फायर कर सकती है। साथ ही वायुसेना के विमान भी लगातार चीन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।

..तो इसलिए लद्दाख से पीछे हटा पड़ोसी चीन

एक महीने से विवाद

भारत और चीन की सेनाएं पूर्वी लद्दाख के गलवान और पैंगोंग सो इलाके में 5 मई से ही आमने-सामने डटी हैं। सूत्रों की माने तो चीन की सेना ने पैंगोग सो और फिंगर 5 इलाके में एलएसी से 100 मीटर पीछे अपने टेंट गाड़े हैं। गलवान में चीन की सेना पट्रोलिंग पॉइंट 14, 15 और 16 पर मौजूद है। हालांकि पट्रोलिंग पॉइंट 15 पर कुछ पीछे हटी है।

1962 में चीन ने यही से किया था मुख्य हमला

  • 1962 में चीन ने यही से किया था मुख्य हमला

    पैंगोंग सो झील 1962 के बाद से ही जब-तब दोनों देशों के बीच तनाव की वजह से सुर्खियों में रहती है। 1962 में चीन ने इसी इलाके में भारत पर मुख्य हमला बोला था।

  • 2017 में पैंगोंग सो में हुई थी भारत-चीन सैनिकों में हिंसक झड़प

    अगस्त 2017 में पैंगोंग सो के किनारे भारत और चीन के सैनिक भिड़ गए थे। दोनों ओर से जमकर लात-घूसे चले थे। पत्थरबाजी, लाठी-डंडे और स्टील रॉड से एक दूसरे पर हमले हुए थे। 19 अगस्त 2017 को इसका वीडियो काफी वायरल हुआ था।

  • पैंगोंग सो झील की रणनीतिक अहमियत

    झील की भौगौलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। यह चुशुल अप्रोच के रास्ते में पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन अगर भविष्य में कभी भारतीय क्षेत्र पर हमले की हिमाकत करता है तो चुशुल अप्रोच का इस्तेमाल करेगा क्योंकि इसका रणनीतिक महत्व है। पैंगोंग सो झील के उत्तर और दक्षिण की तरफ से चीन के दुस्साहस की आशंका हमेशा बनी हुई है।

  • लेह से 54 किलोमीटर दूर है पैंगोंग सो

    पैंगोंग सो लेह के दक्षिणपूर्व में 54 किलोमीटर की दूरी पर है। 134 किलोमीटर लंबी यह झील 604 वर्ग किलोमीटर के दायर में फैली हुई है। जिस पॉइंट पर इसकी चौड़ाई सबसे ज्यादा है, वहां यह 6 किलोमीटर चौड़ी है।

  • झील के 2 तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण

    पैंगोंग झील तिब्बत से लेकर भारतीय क्षेत्र तक फैली है। इसका पूर्वी हिस्सा तिब्बत में है। इसके 89 किलोमीटर यानी करीब 2 तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है। झील के 45 किलोमीटर पश्चिमी हिस्से यानी करीब एक तिहाई हिस्से पर भारत का नियंत्रण है।

  • झील तक चीन ने बना रखी है सड़क

    चीन ने पैंगोंग सो झील के आस-पास मजबूत सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर बना लिया है। झील के किनारों से सटे ऐसे सड़क बना लिए हैं जिनमें भारी और सैन्य वाहन भी आ-जा सकते हैं।

  • जाड़ों में जम जाती है पैंगोंग सो

    पैंगोंग सो झील 14,270 फीट यानी 4,350 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। जाड़ों में यहां तापमान शून्य के बहुत नीचे चला जाता है। इस वजह से यह झील जम जाती है।

लेकिन जानकारों का कहना है कि चीनी सेना के पीछे हटने का मतलब यह नहीं है कि उसने इस मामले में अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। इस तनाव को खत्म करने के लिए दोनों सेनाओं के बीच अब तक 7 बार बैठक हो चुकी है। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और भारतीय सेना के बीच ब्रिगेडियर स्तर पर 4 और मेजर जनरल स्तर की 3 बार बात हो चुकी है लेकिन ये सभी बेनतीजा रहीं।

चीन पर दोहरी मार, साथ आए भारत-ऑस्‍ट्रेलिया

लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत

अब सारी नजरें 6 जून को होने वाली लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत पर टिकी है। इसमें सेना की 14वीं कोर के कमांडर और पीएलए के वेस्टर्न थिअटर के इसी रैंक के अधिकारी हिस्सा लेंगे। भारतीय सेना साफ कर चुकी है कि जब तक स्थिति पहले जैसी नहीं हो जाती, वह एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि चीन के साथ सैन्य और कूटनीति दोनों स्तरों पर बातचीत चल रही है।

पढ़ें, आखिर क्यों भारत से घबरा रहा है चीन!

भारत और चीन के बीच यह विवाद लगभग एक महीने पहले शुरू हुआ था। चीनी सेना ने भारतीय सीमा में घुसकर पैंगोंग सो और गलवान घाटी में कैंप बनाने शुरू कर दिए थे। भारतीय सेना ने इसका कड़ा विरोध करते हुए चीनी सैनिकों से तुरंत पीछे हटने को कहा ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। लेकिन चीन ने ऐसा करने के बजाय अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी। इसके जवाब में भारत ने भी सीमा पर अतिरिक्त सैनिक भेज दिए।

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