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कोरोना पर बड़ी राहत: भारत में चीन नहीं, यूरोप वाला वायरस ज्यादा

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भारत में कोरोना वायरस (corona india news) पर ताजा जानकारी सामने आई है। पता चला है कि देश में जो कोरोना की प्रजाति ज्यादा फैली है वह चीन वाली नहीं बल्कि यूरोप वाली है। यह भी कहा गया है कि लॉकडाउन की वजह से कोरोना को फैलने से रोकने में मदद मिली है।

Edited By Vishnu Rawal | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

भारत में कोरोना
हाइलाइट्स

  • भारत में कोरोना वायरस की जो प्रजाति सबसे ज्यादा है वह यूरोप से आई है
  • कहा गया कि अलग-अलग प्रजाति से जंग मुश्किल होती, एक ही कोरोना प्रजाति से राहत
  • भारत में A2a होलोटाइप सबसे ज्यादा, चीन से 19A और 19B स्ट्रेन भी आए थे
  • कोरोना पर रिपोर्ट में लॉकडाउन को भी सफल बताया गया, इससे वायरस फैलने से रुका

नई दिल्ली

देश में फैले कोरोना वायरस को लेकर बड़ी राहत देनेवाली रिपोर्ट सामने आई है। बताया गया है कि इस वक्त देश में कोरोना की जो प्रजाति सबसे ज्यादा फैली हुई है वह यूरोप से आई है। इसमें राहत की बात यह है कि पहले देशभर में कोविड-19 की अलग-अलग प्रजातियां देशभर में मौजूद थीं, लेकिन अब जब एक ही तरह की प्रजाति ज्यादा है तो उससे लड़ना ज्यादा आसान होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार ने जो लॉकडाउन लगाया उससे वायरस को बड़े स्तर पर फैलने से रोकने में मदद मिली है।

हेल्थ मिनिस्टर को सौंपी गई यह रिपोर्ट

इसकी रिपोर्ट डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नॉलिजी ने तैयार की है। शनिवार को इसे हेल्थ मिनिस्टर हर्षवर्धन को सौंपा गया। बताया गया है कि A2a होलोटाइप ने पहले से मौजूद दूसरे होलोटाइप्स को हटा दिया और खुद फैल गया। एक होलोटाइप का मतलब जीन के समूह से है। रिपोर्ट बताती है कि शुरुआत में भारत में कोरोना की कई सारी प्रजातियां थीं। इसमें वायरस यूरोप, अमेरिका और ईस्ट एशिया से आया था।

पढ़ें- 110 साल की बुजर्ग महिला ने कोरोना को दी मात

कोरोना की बात करें तो A2a होलोटाइप, D614G, 19A और 19B स्ट्रेन जैसी कई अलग-अलग प्रजातियां दुनिया में फैली हैं। भारत में भी कोरोना की ये प्रजातियां थीं। A2a होलोटाइप यूरोप और सउदी अरब से भारत में आया। इससे पहले जनवरी से जब वायरस फैला तो देश में वुहान से आया स्ट्रेन 19A और 19B भी था लेकिन ये केस A2a के मुकाबले कम थे। फिर देशभर में सिर्फ A2a होलोटाइप ही रह गया। दिल्ली में D614G फैला था जो अब उतार पर है। इसकी वजह से राजधानी में कोरोना के एक्टिव केसों में लगातार कमी आ रही है।

​नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा जनसंख्या

  • ​नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा जनसंख्या

    सेंट्रल दिल्ली की बात करें तो यह तीन सबडिविजन में बंटा है। इसमें सिविल लाइंस, करोल बाग और कोतवाली, बुराड़ी जैसे इलाके आते हैं। लाल किला, जामा मस्जिद वाले इलाके जहां लोगों की भीड़ रहती है वे भी इसी में आते हैं। यह नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के बाद राजधानी का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला इलाका है। यहां प्रति स्कॉयर किलोमीटर में 27,730 लोग रहते हैं।

  • ​सीरो सर्वे के नतीजों ने चौंकाया था

    दिल्ली में जब सीरो सर्वे हुआ तो सेंट्रल दिल्ली के नतीजों ने चौंका दिया था। पता चला था कि जिले के 28 प्रतिशत लोगों को संक्रमण हुआ। शहर में यह सबसे ज्यादा था। हालांकि, स्थिति को वक्त रहते काबू किया गया। इस जिले में 5.8 लाख लोगों की जनसंख्या है जिसमें से 10,761 कोरोना मरीज मिले। इसमें से 6,721 प्रतिशत पुरुष और 4,040 महिलाएं थीं।

  • जिले में किस उम्र के कितने मरीज
  • ​पहले इलाके को समझा, उस हिसाब से बनाया प्लान

    सेंट्रल दिल्ली में कोरोना को कंट्रोल करने में शासन-प्रशासन ने हरसंभव कोशिश की। सेंट्रल दिल्ली की डीएम निधि श्रीवास्तव बताती हैं कि यह सब हर इलाके के हिसाब से अलग रणनीति बनाने पर ही संभव हुआ। निधि ने बताया कि शुरुआत में हम देश के 20 सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक थे। फिर सबसे पहले हमने इलाके की भौगोलिक स्थिति और लोगों की मानसिकता को समझने का काम किया।

  • जैसा इलाका वैसा प्लान

    ​डीएम निधि ने बताया कि चांदनी महल जैसे इलाकों में इमामों और आशा वर्कर की मदद से जागरूकता फैलाई गई। क्योंकि वहां लोग उनकी सुन रहे थे। निधि ने बताया ऐसे ही करोल बाग के पास बापा नगर के दूसरे धारावी बनने के डर था। वहां लगातार केस निकल रहे थे। चांदनी महल की तरह वहां होम आइसोलेशन मुमकिन नहीं था, इसलिए संक्रमित लोगों को क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया। फिर धीरे-धीरे केसों में कमी आई। चांदनी महल जैसे इलाकों में इमामों और आशा वर्कर की मदद से जागरूकता फैलाई गई। निधि ने बताया ऐसे ही करोल बाग के पास बापा नगर के दूसरे धारावी बनने के डर था। वहां लगातार केस निकल रहे थे। चांदनी महल की तरह वहां होम आइसोलेशन मुमकिन नहीं था, इसलिए संक्रमित लोगों को क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया। फिर धीरे-धीरे केसों में कमी आई।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि मार्च से मई के बीच जो कोरोना लॉकडाउन लगाया गया उसने काम किया है। इंटरनैशनल ट्रैवल बैन से वायरस की नई प्रजातियां भारत नहीं आ पाईं, उसी तरीके से इंटर-स्टेट ट्रैवल बैन से मौजूदा प्रजातियां इधर से उधर नहीं फैल पाईं।

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Web Title corona india study shows variant of coronavirus brought in by travellers from europe most dominant(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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