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Kanpur shootout: 22 साल पहले जब बिकरू में विकास के हथियारबंद परिजन ने घेरा था पुलिस का रास्ता

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कानपुर के बिकरू में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या से 22 साल पहले भी विकास दुबे के लिए पुलिस का रास्ता घेरना कठिन नहीं था। हत्या की कोशिश के एक मामले में साल 1998 में जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने आई थी तब उसके परिवार के लोगों ने हथियार थामकर पुलिस का रास्ता ब्लॉक कर दिया था।

Edited By Raghavendra Shukla | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

एक बार फिर मुठभेड़ में ‘ढेर’ गैंगस्टर विकास दुबे! देखें क्राइम सीन का वीडियो
हाइलाइट्स

  • 22 साल पहले का बिकरू कांड, विकास के परिजनों ने हथियार लेकर पुलिस को घेरा था
  • हत्या के प्रयास के एक मामले में विकास और उसके भाई को अरेस्ट करने आई थी पुलिस
  • हथियारों से लैस होकर विकास के परिजन ने ब्लॉक कर दिया था पुलिस का रास्ता

कानपुर

उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिकरू गांव में 2-3 जुलाई को गैंगस्टर विकास दुबे ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर पुलिस टीम पर हमला किया था और सीओ समेत 8 सिपाहियों को जान से मार दिया था। हालांकि, सड़कें ब्लॉक करना, पुलिस को घेरना और फिर भाग जाना, विकास के लिए कोई नई बात नहीं थी। बिकरू कांड से 22 साल पहले भी एक बार जब पुलिस हत्या के प्रयास के एक मामले में उसे गिरफ्तार करने आई थी, तब उसके परिवार ने उसे पुलिस से बचाने के लिए हथियार उठाए थे।

घटना साल 1998 की है। उस समय विकास दुबे बिकरू गांव का प्रधान था। हत्या के प्रयास के एक मामले में उसके ऊपर मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस टीम को जब पता चला कि दुबे बिकरू गांव में ही है, तब उसे गिरफ्तार करने के लिए एक टीम को बिकरू रवाना किया गया। पुलिस के पास विकास और उसके भाई दीपू को गिरफ्तार करने का वारंट था। पुलिस जैसे ही विकास और उसके भाई को गिरफ्तार करने के लिए बिकरू गांव पहुंची, विकास के परिवार के लोगों ने उनका रास्ता घेर लिया।

‘आतंक के युग का अंत’

  • 'आतंक के युग का अंत'

    कानपुर के बिकरू गांव में लोगों ने विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद मिठाइयां बांटीं। स्थानीय लोगों ने कहा, ‘यह पूरा क्षेत्र बहुत खुश है। ऐसा लगता है कि आखिरकार हम आजाद हो गए हैं। यह आतंक के एक युग का खात्मा है। हर शख्स आज बहुत खुश है।’

  • अपने पिता के अपमान का यूं लिया था बदला

    स्थानीय लोगों का कहना है, विकास शुरू से ही क्रूर था। 1990 में विकास ने अपने पिता के अपमान का बदला लेने के लिए पास के ही डिब्बा नवादा गांव में घुसकर लोगों की पिटाई की थी।

  • ...तब विकास ने खूब कहर बरपाया

    ग्रामीण बताते हैं कि 1992 में गांव में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। विकास ने यहां खूब कहर बरपाया था। कई लोग अपनी याददाश्त खो बैठे। कई सदमे में चल बसे।

  • कुएं से पानी लेने के लिए भी विकास की इजाजत

    क्षेत्र में स्थित फैक्ट्रियों से वसूली हो या फिर चलते ट्रकों को लूटना, विकास दुबे की जिंदगी का यह आम किस्सा था। बताया जाता है कि कुछ वक्त पहले गांव में पानी के नल नहीं थे। मजबूरन लोगों को विकास दुबे के घर के करीब बने कुएं से पानी लेने आना पड़ता था। इसके लिए बाकायदा विकास दुबे इजाजत देता था। कहा जाता है कि ऐसा न करने पर वह लोगों की बुरी तरह से पिटाई करता।

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पुलिस का रास्ता किया ब्लॉक

हथियारों के साथ विकास के परिवार के लोग मौके पर खड़े हो गए और रास्ता ब्लॉक कर दिया। उन्होंने विकास और उसके भाई को बचाने के लिए पुलिस टीम पर हमला भी बोला था। एक पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि पुलिस वाले संख्या में कम थे। इस वजह से हथियारबंद विकास के गुर्गों ने उसे और उसके भाई को छुड़ा लिया था। इस घटना के 22 साल बाद एक बार फिर से पुलिस की टीम विकास को गिरफ्तार करने के लिए 3 जुलाई को बिकरू पहुंची थी।

यह भी पढ़ेंः पोस्टमॉर्टम में खुलासा- आर-पार हो गई थीं 3 गोलियां, शॉक और हैमरेज से गई थी विकास दुबे की जान

8 पुलिसकर्मियों की ले ली जान

इस बात विकास के गुर्गों ने मोर्चा संभाला और हथियारों से लैस होकर छत पर घात लगाकर बैठ गए। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर न सिर्फ हमला किया बल्कि सीओ देवेंद्र मिश्र समेत 8 पुलिसकर्मियों की जान ले ली। इस जघन्य वारदात को अंजाम देने के बाद विकास दुबे गुर्गों सहित फरार हो गया। हालांकि, इस बार वह कानून के शिकंजे से ज्यादा दिन दूर नहीं रह पाया और घटना के 6 दिन बाद पुलिस ने उसे मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर में दबोच लिया।

उज्जैन से कानपुर लाने के दौरान 10 जुलाई को विकास को लाने के दौरान एसटीएफ के काफिले की गाड़ी पलट गई। इसके बाद विकास की पिस्टल लेकर भाग रहे विकास को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया।

विकास दुबे

विकास दुबे

Web Title gangster vikas dubey family blocked road assaulted cops to rescue him 22 years ago(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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