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चीन से टेंशन के बीच भारत की रूस से बड़ी डील, खरीदे जाएंगे 33 फाइटर जेट

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लद्दाख (Ladakh) में चीन (China) से टेंशन के बीच भारत सरकार ने बड़ी रक्षा खरीदी को मंजूरी दी है। इसमें रूस (Russia) से 12 सुखोई-30 (Sukhoi-30) लड़ाकू विमान और 21 मिग-29 (MiG-29 aircraft) विमान खरीदे जाएंगे। इसके साथ ही एयर फोर्स और नेवी को मजबूत बनाने के लिए 248 एस्ट्रा एयर मिसाइल की खरीदी होगी।

Edited By Vishnu Rawal | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

सुखोई लड़ाकू विमान।
हाइलाइट्स

  • चीन से लद्दाख में तनातनी के बीच रूस के साथ भारत की डील
  • भारत रूस से 33 फाइटर जेट खरीदेगा, इसमें सिखोई-30 और मिग-21 शामिल
  • भारत ने एयरफोर्स और नेवी के लिए एस्ट्रा एयर मिसाइल खरीदी को मंजूरी भी दी
  • रूस के साथ होनेवाले सौदे के लिए बजट 18,148 करोड़ रुपये रखा गया है

नई दिल्ली

लद्दाख में चीन से तनातनी के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और रूस के राष्ट्रपति पुतिन (President Putin) की फोन पर बातचीत हुई। इसके कुछ देर बाद ही दोनों देशों के बीच एक बड़े रक्षा सौदे की जानकारी दी गई है। इसमें रक्षा मंत्रालय ने रूस से 33 फाइटर जेट खरीदने का एलान किया है। इसके लिए कुल बजट 18 हजार 148 करोड़ रखा गया है। इसमें भारत अपने दोस्त रूस से सुखोई-30 और मिग-29 विमान खरीदेगा। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी से बातचीत में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच सामरिक सबंध और मजबूत होंगे।

पढ़ें-

मिली जानकारी के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने रूस से 33 नए फाइटर जेट खरीदने को मंजूरी दी है। इसमें 12 सुखोई-30 लड़ाकू विमान और 21 मिग-29 भी शामिल हैं। इसके साथ ही पहले से मौजूद 59 मिग-29 को अपग्रेड भी करवाया जाएगा। इस पूरे पॉजेक्ट की कुल लागत 18,148 करोड़ रुपये बताई गई है।

रूस के T90 टैंक

  • रूस के T90 टैंक

    पिछले साल जब लद्दाख में चीन के साथ तनावपूर्ण स्थिति पैदा हुई थी, तब भारतीय सेना और एयरफोर्स ने ऊंचाई वाले इलाकों में जोरदार युद्धाभ्‍यास किया था और दुश्‍मन को अपनी सैन्‍य ताकत का अहसास कराया था। रूस से आए सेना के अत्‍याधुनिक टी-90 भीष्‍म टैंकों की गड़गड़ाहट से लद्दाख की पहाड़ी वादियां भी थर्रा उठी थीं। ये टैंक अपनी मोबिलिटी, फायर करने की क्षमता, देखते ही निशाना मारने की काबिलियत और आत्मरक्षा के लिए जाने जाते हैं। इनके अलावा एयर फोर्स के सी-17 विमानों ने रात के अंधेरे में भी रसद पहुंचाने की क्षमता का प्रदर्शन किया था।

  • रूस का Mi 17 V5 हेलिकॉप्टर

    रूस निर्मित एमआई 17वी5 चॉपर का भी इस्‍तेमाल इस युद्धाभ्यास में किया गया था। इन्हें दुनिया के सबसे अडवांस्ड हेलिकॉप्टर्स में से एक माना जाता है। ये असॉल्ट, ऐंबुलेंस और ट्रांसपोर्टर के तौर पर बेहतरीन काम कर सकते हैं। खास बात यह है कि यह बेहद सर्दी से लेकर बेहद गर्मी वाले इलाकों में भी बेहतरीन काम करते हैं। इनका फ्लाइट नैविगेनशन, दिन-रात, सर्दी-गर्मी, बारिश-तूफान कैसे भी हालात में ऑपरेट करने में मदद करता है।

  • अमेरिका का C 130J एयरक्राफ्ट

    अमेरिका का 4-इंजन टर्बोप्रॉप मिलिटरी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बिना किसी खास रनवे के टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकता है। इसे पहले मेडिकल इवैक (Evacuation) और कार्गो के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसके खास एयरफ्रेम की वजह से इसका इस्तेमाल असॉल्ट, सर्च ऐंड रेस्क्यू, साइंटिफिक रीसर्च, मौसम के जायजे, एरियल रिफ्यूलिंग, मैरीटाइम पट्रोल और एरियल फायर फाइटिंग के लिए किया जाता है।

  • इजरायल का Heron UAV

    बीच की ऊंचाई पर उड़ने वाले इजरायल के Heron UAV की खासियत है ज्यादा वक्त तक लंबी दूरी तय कर पाने की काबिलियत। यह अनमैन्ड एरियल वीइकल 52 घंटों तक उड़ान भर सकता है। यह एक इंटरनल जीपीएस नैविगेशन डिवाइस से नैविगेट करता है। पहले से प्रोग्राम्ड फ्लाइट होने पर इसकी लैंडिंग और टेक-ऑफ भी प्रोग्राम्ड होता है। साथ में ग्राउंट कंट्रोल स्टेशन से इसे मैन्युअली भी ऑपरेट किया जा सकता है।

  • देखें वीडियो- सैन्य वार्ता के बाद भारत-चीन ने शांतिपूर्ण तरीके से सीमा विवाद सुलझाने का भरोसा जताया

रक्षा मंत्रालय ने 248 एस्ट्रा एयर मिसाइल की खरीदी की भी इजाजत दी। यह भारतीय एयर फोर्स और नेवी दोनों के काम आ सकेगी। इसके साथ ही DRDO द्वारा बनाई गई एक हजार किलोमीटर रेंज वाली क्रूज मिसाइल के डिजाइन को भी मंजूरी मिल गई है।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने कुल 38,900 करोड़ के प्रपोजल्स को मंजूरी दी है। इसमें 31 हजार करोड़ भारतीय इंडस्ट्री से होंगे। इन पैसों से पिनाका रॉकेट लॉन्चर का गोला-बारूद खरीदा जाएगा, लड़ाकू वाहनों की अप्रेडिंग आदि होगी।



जुलाई में राफेल भी आ रहा


चीन से तनाव के बीच 27 जुलाई को 6 राफेल विमानों की पहली खेप भारत पहुंच जाएगी। दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों और सेमी स्‍टील्‍थ तकनीक से लैस इन विमानों के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से देश की सामरिक शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा। भारत आने वाले राफेल फाइटर जेट्स में दुनिया की सबसे आधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली मीटियर मिसाइल भी लगी होगी। 6 राफेल जेट फ्रांस के बोर्डोक्स से भारत उड़कर ही आएंगे।

आसमान की सुरक्षा ‘आकाश’ के जिम्‍मे

  • आसमान की सुरक्षा 'आकाश' के जिम्‍मे

    आसमान में ऊंचाई पर उड़ता एयरक्राफ्ट हो या निचले इलाकों में मंडराता ड्रोन, भारत का ऐडवांस्‍ड एयर डिफेंस (AAD) मिसाइल किसी भी एलियन ऑब्‍जेक्‍ट को उड़ाने में सक्षम है। इसी का हिस्‍सा है Akash मिसाइल। जमीन से हवा में मार करने वाली यह मिसाइल 30 किलोमीटर तक के दायरे में बैलिस्टिक मिसाइल्‍स को इंटरसेप्‍ट कर सकती है। 720 किलो वजनी आकाश मिसाइल सुपरसोनिक स्‍पीड से चलती है। इतना काफी न हो तो 18 किलोमीटर ऊंचाई तक मौजूद दुश्‍मन की मिसाइल को निशाना बनाने में सक्षम है। इसे ट्रैक या व्‍हील, दोनों सिस्‍टम से फायर किया जा सकता है।

  • लेटेस्‍ट गैजेट्स से लैस है आकाश मिसाइल

    आकाश मिसाइल सिस्‍टम में ऐडवांस्‍ड कम्‍प्‍यूटर और एक इलेक्‍ट्रो-मेकेनिकल ऐक्टिवेटर लगा है। यह ‘राजेंद्र’ नाम के रडार से सिग्‍नल लेकर निशाना साधती है। ‘राजेंद्र’ में कई ऐडवांस्‍ड फीचर्स हैं जैसे वह अपनी रेंज में 64 टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है। यह एक साथ चार निशानों की तरफ 8 मिसाइलें छोड़ने में सक्षम है।

  • प्रद्युम्‍न से बचकर जा पाना बहुत मुश्किल

    आकाश के बाद, अब बारी पृथ्‍वी की। पृथ्‍वी एयर डिफेंस यानी PAD सिस्‍टम 80 से 120 किलोमीटर तक की रेंज में इनकमिंग मिसाइल्‍स को संभाल सकता है। पृथ्‍वी मिसाइल पर ‘प्रद्युम्‍न’ असल में टूज मिसाइल है। यह सुपरसोनिक मिसाइल आसानी से 300 किलोमीटर से 2000 किलोमीटर रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइल्‍स को हवा में ही ढेर कर सकती है। यह मिसाइल सिस्‍टम वातावरण के बाहर से आने वाली मिसाइल्‍स को भी उड़ा सकता है। इसमें लॉन्‍ग रेंज का ट्रैकिंग रडार लगा है जो इसे टारगेट लॉक करने में मदद करता है। ट्रैजेक्‍टरी ऑप्टिमाइजेशन फीचर की बदौलत यह डिफेंस सिस्‍टम हाई और लो, दोनों तरह के ऑल्‍टीट्यूड्स में यूज किया जा सकता है।

  • धरती से बाहर भी चीन ही हरकत का जवाब देने में सक्षम

    भारत के पास सिर्फ धरती पर ही नहीं, अंतरिक्ष में भी युद्ध लड़ने की क्षमता है। दुनिया में सिर्फ तीन और देशों- अमेरिका, रूस और चीन के पास ही ऐंटी-सैटेलाइट मिसाइल है। भारत ने पिछले साल 17 मार्च को ‘मिशन शक्ति’ सफलतापूर्वक पूरा किया था। तब हमने धरती की निचली कक्षा में मौजूद एक सैटेलाइट को ऐंटी सैटेलाइट मिसाइल से उड़ाकर पूरी दुनिया में अपनी स्‍पेस पावर का लोहा मनवाया था।

  • 'अश्विन' और SPYDER से बचकर कहां जाएगा चीन

    भारत के पास इजरायल की SPYDER मिसाइल भी है जो 5 से 50 किलोमीटर तक की रेंज में मार कर सकती है। इसके अलावा ‘अश्विन’ नाम की एक स्‍वदेशी मिसाइल भी है जो करीब 30 किलोमीटर तक के ऑल्‍टीट्यूट पर मिसाइल्‍स को इंटरसेप्‍ट कर लेती है।

  • ​जल्‍द भारत को मिलने वाला है 'ब्रह्मास्‍त्र'

    भारत को रूस की ओर से जल्‍दी ही S-400 Triumf एयर डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम मिलने वाला है। यह सिस्‍टम भारतीय एयरफोर्स की रीच को चार गुना तक बढ़ा देगा। S-400 Triumf दुनिया के सबसे ऐडवांस्‍ड एयर डिफेंस सिस्‍टम्‍स में से एक है। इसमें जो रडार लगे हैं वह 1,000 किलोमीटर दूर से ही आ रहे ऑब्‍जेक्‍ट को पकड़ सकते हैं। दर्जनों ऑब्‍जेक्‍ट्स पर एकसाथ नजर रखने में सक्षम यह डिफेंस सिस्‍टम फाइटर एयरक्राफ्ट्स पर निशाना लगाने में जल्‍दी चूकता नहीं। एक S-400 सिस्‍टम से एक पूरे स्‍पेक्‍ट्रम को हवाई खतरे से सुरक्षित किया जा सकता है। चीन के साथ बॉर्डर पर जारी तनाव के बीच इस सिस्‍टम को जल्‍द हासिल करने की कोशिश हो रही है ताकि पूर्वी लद्दाख सेक्‍टर में सिर्फ एक डिफेंस सिस्‍टम से ही ड्रैगन की हर हरकत पर नजर रखी जाए।

  • दो टन वजनी है चीन की HQ-9 मिसाइल

    रूस के S-300V जैसी चीन की HQ-9 भी टू-स्‍टेज मिसाइल है। जमीन से हवा में मार करने वाली यह मिसाइल सिस्‍टम करीब दो टन वजनी और 7 मीटर लंबी है। HQ-9 चीन का मेन एयर डिफेंस सिस्‍टम है। इसके वारहेड की अधिकतम रेंज 200 किलोमीटर और स्‍पीड 4.2 मैच है। इस मिसाइल में खामी यह है कि इसका थ्रस्‍ट वेक्‍टर कंट्रोल एक साइड से नजर आता है। यह मिसाइल पहले बहुत बड़ी थी, रूस की मदद से अब इसे इतना छोटा बना लिया गया है कि ट्रांसपोर्ट लॉन्‍चर से छोड़ा जा सके। फिर भी इसकी बैलिस्टिक क्षमता पर एक्‍सपर्ट्स को शक है।

  • चीन ने रूस से खरीदा है S-300 मिसाइल सिस्‍टम

    भारत और चीन के म्‍युचुअल फ्रेंड यानी रूस ने दोनों देशों को हथियार बेचे हैं। रशियन S-300 एयर डिफेंस सिस्‍टम को चीन ने खरीदा और फिर उसे अपने यहां और डेवलप किया। S-300V का चीनी वर्जन HQ-18 के नाम से जाना जाता है। इन मिसाइल सिस्‍टम की रेंज 100 किलोमीटर तक है। कुछ मिसाइलें 150 किलोमीटर तक भी मार कर सकती है। इसका रडार एक साथ 200 टारगेट्स को डिटेक्‍ट कर सकता है।

  • चीन के पास पहले से है S-400 डिफेंस सिस्‍टम

    दुनिया के सबसे ऐडवांस्‍ड मिसाइल सिस्‍टम्‍स में से एक, S-400 Triumf की एक खेप चीन के पास पहले से मौजूद है। इस साल फरवरी में रूस ने दूसरी खेप चीन को भेजी थी। 2014 में चीन ने दो S-400 सेट मांगे थे। पहले सेट की डिलीवरी 2018 में पूरी हुई। यानी तुलनात्‍मक रूप से देखें तो दोनों देशों के पास मजबूत एयर‍ डिफेंस सिस्‍टम है। हालांकि लॉन्‍च रेंज में भारत अभी थोड़ा कमजोर नजर आता है मगर S-400 आ जाने से उसकी स्थिति और मजबूत हो जाएगी।

पीएम मोदी और पुतिन ने की फोन पर बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही व्लादिमीर पुतिन से बात की थी। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में जीत की 75वीं वर्षगांठ पर रूस को बधाई दी। इसके साथ ही रूस को 2036 तक के लिए राष्ट्रपति चुने जाने की बधाई भी दी। ऐसा संविधान में संसोधन के बाद हुआ है। रूस में पिछले दिनों इसके लिए वोटिंग हुई थी, जिसके नतीजे अब आ गए हैं। रूस ने कहा कि भारत और रूस के बीच सामरिक सबंध और मजबूत होंगे। चीन से गतिरोध के बीच पुतिन का यह बयान अहम है। जीत के बाद पुतिन को फोन मिलानेवाले मोदी पहले ग्लोबल लीडर थे।

रूसी ‘हवाई योद्धा’ एसयू-57 लड़ाकू विमान ने ऐसे दागी मिसाइल, हैरत में आई दुनिया

अमेरिका के एफ-35 के टक्कर का रूस का यह सुखोई

बता दें, अमेरिका का लड़ाकू विमान F-35 स्‍टील्‍थ को दुनिया में सबसे शक्तिशादी ‘हवाई योद्धा’ माना जाता है। पिछले साल ही अमेरिकी F-35 स्‍टील्‍थ की टक्कर का विमान रूस ने मैदान में उतार दिया था। रूस ने पांचवीं पीढ़ी के अत्‍याधुनिक सुखोई लड़ाकू विमान Su-57E को दुनिया के सामने पेश किया था। यह विमान रेडार की पकड़ में आए बिना सुपरसोनिक स्‍पीड से उड़ान भरकर दुश्‍मन के ठिकानों को तबाह कर सकता है।

Web Title defence ministry clear proposal to acquire 33 new fighter aircraft from russia amid tension with china(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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