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सीमा पर तेजी से सड़क निर्माण और सशस्त्र सुरक्षा पोस्ट बनाने में जुटा नेपाल, भारत भी हुआ मुस्तैद

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देखिए, उत्तराखंड के धारचूला में सीमा के पास उतरा नेपाल का हेलिकॉप्टर
हाइलाइट्स

  • सीमा पर नेपाल के बदले तेवर से भारत अलर्ट
  • चीन के बाद नेपाल भी सीमा तक सड़क बनाने में जुटा
  • भारत ने ITBP के साथ ही सेना को भी अलर्ट पर रखा

महेश पांडेय, देहरादून

भारत की तरफ से कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर तवाघाट से लिपुलेख तक सड़क निर्माण करने के बाद से नेपाल के सुर क्या बदले, वह भारत के सीमा क्षेत्र के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देने लगा है। एक पखवाड़े के भीतर जिस तेजी के साथ सड़क निर्माण हो रहा है, उससे प्रतीत होता है कि नेपाल भारत सीमा पर तेजी से पैदल मार्गों और सड़क निर्माण करना चाह रहा है। चीन के बाद नेपाल भी भारतीय सीमा तक सड़कों का जाल बिछाने में जुट गया है।

नेपाल के दार्चुला जिले के छांगरू-तिंकर के साथ ही सीमा से सटे अन्य गांवों के लिए भी तेजी से सड़कें बनाई जा रही हैं। भारत की सीमा से लगे नेपाली क्षेत्र दार्चुला के अलावा बैतड़ी में भी एक दर्जन से अधिक सड़कों का निर्माण जारी है। ये अधिसंख्य सड़कें भारत की सीमा बनाने वाली महाकाली नदी के किनारे बसे गांवों के लिए बन रही हैं। तीनों जिलों में केवल चंपावत जिले के बनबसा में ही मोटर पुल है, जबकि पिथौरागढ़ जिले में झूलाघाट से लेकर कालापानी में स्थित सीतापुल तक झूला पुलों से ही आवागमन होता है।

पढ़ें:सड़क, हेलिपैड…आखिर किस तैयारी में जुटा है नेपाल?

पिथौरागढ़, चंपावत और उधमसिंहनगर जिलों की सीमाओं से लगी भारत-नेपाल सीमा की लंबाई पिथौरागढ़ जिले में सबसे अधिक लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर है। उत्तराखंड से नेपाल की 275 किलोमीटर लंबी सीमा लगी है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी जिलों की 350 किलोमीटर लंबी सीमा चीन से लगी है, जबकि इन जिलों की सीमाओं तक चीन पहले ही हाईटेक सड़कें बना चुका है।

बदलते माहौल को भांपकर भारत भी अलर्ट

बताया जा रहा है कि नेपाल की योजना सीमा से लगे अधिक से अधिक गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने की है। भारतीय क्षेत्र धारचूला से लगे दार्चुला के छांगरू, तिंकर के साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछ जाने के बाद भारतीय सीमा पर नेपाली सुरक्षा बलों की पहुंच आसान हो जाएगी। भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव समेत नेपाल में बन रहे भारत विरोधी माहौल के चलते धारचूला से कालापानी तक सशस्त्र सीमा बल भी अपने जवानों की तैनाती बढ़ा रहा है। धारचूला से आगे नेपाल सीमा पर कालापानी तक भारत में एसएसबी की एलागाड़, पांगला, मालपा, लामारी, बूंदी, गर्ब्यांग और कालापानी में कंपनी तैनात है।

ITBP और सेना को अलर्ट पर रखा गया

सामान्यतया इन कंपनियों में 130 से 140 तक जवान रहते हैं लेकिन इन दिनों हालात को देख इन कंपनियों में जवानों की संख्या को कहीं दोगुना, तो कहीं ढाई गुना तक कर दिया गया है। नेपाल के दार्चुला क्षेत्र के छांगरु में चीन सीमा पर आइटीबीपी की गुंजी, कालापानी, ऊं पर्वत, लिपुलेख में स्थित पोस्टों सहित कुटी, ज्योलिंगकोंग में भी जवानों की संख्या बढ़ाई गई है। जोहार से लगी सीमा पर भी आइटीबीपी और सेना के जवानों की संख्या बढ़ा कर दोनों बलों को अलर्ट पर रखा गया है।

सशस्त्र बल की बॉर्डर आउट पोस्ट शुरू करने के बाद अब नेपाल भारतीय क्षेत्र गुंजी के उस पार नेपाली क्षेत्र में सशस्त्र बल की आउटपोस्ट बनाने की तैयारी कर रहा है। नेपाल के छांगरु, तिंकर गांव और बीओपी चौकी तक पहुंचने के लिए उसे भारत के रास्ते नहीं जाना पड़े , इसलिए उसने नेपाल ने घाटीबगड़ के निकट दो सौ मीटर लंबा पैदल मार्ग पखवाड़े भर में तैयार कर दिया है।

नेपाल में घाटीबगड़ क्षेत्र का पैदल मार्ग कई साल पूर्व ध्वस्त हो गया था। नेपाल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों के दो गांवों छांगरु और तिंकर के ग्रामीण भारत के रास्ते माइग्रेशन करते रहे। भारत के रास्ते गर्ब्यांग गांव जाने के बाद काली नदी पर सर्वाधिक ऊंचाई वाले पैदल पुल से ये नेपाली माइग्रेंट नेपाल में प्रवेश करते थे। लेकिन अब जब से नेपाल ने भारत से विमुख होने की ठानी है, तब से नेपाल के लोगों की भारतीय सीमा से होकर जाने पर रोक लगा दी है। घाटीबगड़ में नेपाल ने अपनी सेना की टुकड़ी बैठा दी है तो छांगरु में नेपाल सशस्त्र बल की बीओपी खोल दी है। मार्ग के बनते ही नेपाल के दो गांवों के ग्रामीणों को अब माइग्रेशन के लिए भारत के रास्ते नहीं जाना होगा, नेपाल सशस्त्र बल के जवान भी इसी मार्ग पर गश्त कर सकेंगे।

डेढ़ महीने में मालपा और बूंदी में ग्रिफ ने बनाए दो बेली ब्रिज

पिथौरागढ़ जिले को चीन सीमा से जोड़ने वाली सड़क धारचूला-लिपुलेख ग्रिफ ने मालपा बेली ब्रिज का निर्माण पूरा कर पुल से वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी है। रणनीतिक रूप से अहम इस सड़क पर ग्रिफ बहुत तेजी से कार्य कर रही है। इस पुल के बनने बाद सीमा पर जाने वाले सेना के जवानों और व्यास घाटी के सात गांवों के लोगों को तो लाभ मिलेगा ही, इससे सीमा पर तैनात सेना और आईटीबीपी को भी लाभ होगा। तवाघाट-लिपुलेख मार्ग पर बीआरओ हीरक परियोजना के तहत सड़क निर्माण में लगी है।

आठ मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सड़क का ऑनलाइन उद्घाटन करने के बाद 67 आरसीसी ग्रिफ ने सीमा विवाद और आगामी मानसून को देखते हुए युद्ध स्तर पर दिन रात सड़क निर्माण करके डेढ़ महीने के अंदर बुदि और मालपा में दो बेली ब्रिज तैयार कर दिए हैं। अब ग्रिफ गुंजी, नाबी, कुटी लिम्पियाधुरा और चीन सीमा में गुंजी, कुटी ज्योलिंगकांग सड़क का कार्य भी युद्ध स्तर से कर रही है। इस सड़क के बनने से आदि कैलाश यात्रियों को भी फायदा मिलेगा। यहां पर 34 किलोमीटर सड़क का 67आरसीसी ग्रिफ तेजी निर्माण कर रही है। इस सड़क के तीन माह में तैयार होने की संभावना है।

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