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कच्‍छ से कटरा तक भूकंप से ह‍िली धरती, गुजरात में 5.5 तो जम्‍मू-कश्‍मीर में 3.0 मापी गई तीव्रता

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Publish Date:Sun, 14 Jun 2020 10:25 PM (IST)

राजकोट/कटरा, एजेंसियां। Earthquake in Rajkot Gujarat : गुजरात के राजकोट में भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर सिस्‍मोलॉजी ने भूकंप की तीव्रता 5.5 बताई है। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, रविवार रात 8:13 बजे आए इस भूकंप का केंद्र गुजरात के कच्‍छ जिले में भचाऊ के पास बताया जाता है। भूकंप के झटके गुजरात के कई शहरों में महसूस किए गए। भूकंप के झटकों से कच्‍छ, राजकोट, अहमदाबाद और पाटन में लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। इसके अलावा जम्‍मू-कश्‍मीर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। 

जम्‍मू-कश्‍मीर में भी झटके 

इसके अलावा जम्‍मू-कश्‍मीर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, जम्‍मू-कश्‍मीर के कटरा में रविवार को रात 8:35 बजे 3.0 तीव्रता का झटका महसूस किया गया। बताया जाता है कि जम्‍मू-कश्‍मीर में भूकंप का केंद्र कटना से 90 किलोमीटर पूरब में था। इससे पहले जम्‍मू-कश्‍मीर में मंगलवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए थे जिसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.9 मापी गई थी।

मुख्‍यमंत्री ने ली हालात की जानकारी 

मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने कच्‍छ, राजकोट और पाटन जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर भूकंप को लेकर हाल जाना। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने जिलाधिकारियों से टेलिफोन के जरिए बातचीत करके हालात की जानकारी ली। फ‍िलहाल भूकंप से किसी जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। 

2001 में 13 हजार लोगों की हो गई थी मौत 

बताया जाता है कि भूकंप का सबसे ज्यादा असर कच्छ में देखा गया जहां 10 सेकंड तक लोगों ने झटके महसूस किए। मालूम हो कि 19 साल पहले यानी 26 जनवरी 2001 को कच्छ के भुज में 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था जिसमें 13 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। भूकंप के झटके जामनगर, सुरेंद्रनगर और जूनागढ़ में भी महसूस किए गए। 

बीते दो महीनों में कई झटके 

बीते दो महीनों के दौरान दिल्‍ली एनसीआर में भी 12 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।बीते दिनों दिल्‍ली एनसीआर के अलावा देश के विभिन्‍न इलाकों में भी भूकंप के कई झटके महसूस किए गए हैं। बार बार आ रहे भूकंप के झटकों के चलते लोगों में भी दहशत का आलम है। विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार आ रहे भूकंपों की एक बड़ी वजह धरती की सूखती कोख भी है। भूजल स्तर में लगातार आ रही गिरावट से धरती के भीतर स्थित फाल्ट लाइनों का लोड असंतुलित हो रहा है।

झटके दे रही प्रकृति

कोरोना संकट के बीच प्रकृति भी रुक रुक कर झटके दे रही है। भारत में निसर्ग, अम्फान जैसे चक्रवात और दिल्ली-एनसीआर में झटकों के बाद गुजरात में आया भूकंप इसका आभास करा रहा है। वैसे भारत के अलावा दुनिया के तीन मुल्‍कों में अलग अलग वक्‍त पर भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए गए। तुर्की में 5.7 तीव्रता का तगड़ा झटका महसूस किया गया जबकि ताइवान में 5.6 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। जापान में भी 6.3 तीव्रता का तगड़ा झटका महूसस किया गया। हालांकि इन तीनों भूकंपों की टाइमिंग अलग अलग थी। 

तुर्की में तीन घायल 

पूर्वी तुर्की के बिंगोल प्रांत में आए भूकंप में तीन लोग घायल हो गए हैं। भूकंप का केंद्र बिंगोल के कार्लियोवा ज‍िले में था। वहीं ताइवान में आए भूकंप का केंद्र धरती के 55 किलोमीटर की गहराई में था। दूसरी ओर जापान में आए भूकंप का केंद्र 160 किलोमीटर की गहराई में था। हालांकि उक्‍त तीनों भूकंपों में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। 

प्‍लेटों के बीच टकराव 

वैसे वैज्ञानिक हाल‍िया आए भूकंपों को लेकर दूसरे पहलुओं पर भी अध्‍ययन कर रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि धरती का वजूद सात टेक्टोनिक प्लेटों पर टिका है और जब प्लेटें जब आपस में टकराती हैं या धरती के गर्भ में कुछ हलचल होती है तो भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए जाते हैं। भारत इंडो आस्ट्रेलियन प्लेट पर टिका है। विशेषज्ञों की मानें तो देश में भूकंप की वजह इस प्लेट का यूरेशियन प्लेट से टकराना भी है। फाल्ट लाइनों की एडजस्टमेंट के कारण भी भूकंप आते हैं। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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